यस्यानुरागललितस्मितवल्गुमन्त्र-
लीलावलोकपरिरम्भणरासगोष्ठाम् ।
नीता: स्म न: क्षणमिव क्षणदा विना तं
गोप्य: कथं न्वतितरेम तमो दुरन्तम् ॥ २९ ॥
अनुवाद
जब वे हमें रासलीला के समागम में ले आए, जहाँ हमने उनकी मुस्कानों का, उनकी गुप्त बातों का, उनकी चितवनों का, और उनके आलिंगनों का आनंद लिया, तब हमने कई रातों को एक पल की तरह बिताया। हे गोपियों, हम उनकी अनुपस्थिति के अंधकार को कैसे पार करेंगी?
When He brought us to the gathering of Raasnritya where we enjoyed His loving and charming smiles, His delightful secret talks, His playful glances and His embraces, we spent many nights which seemed like mere moments. O gopis, how can we then cross the impenetrable darkness of His absence?
तात्पर्य
गोपियों के लिए, कृष्ण के संग में बिताया हुआ लंबा समय एक पल की तरह बीत गया, और उनके बिना बिताया गया एक पल भी बहुत लंबे समय की तरह लगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)