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bhagavat 10.39.25: जब दाशार्ह, भोज, अन्धक, वृष्णि और सात्वत लोग मथुरा में देवकी के पुत्र को देखेंगे तो निश्चित ही उनके नेत्रों के लिए एक महान उत्सव होगा, ठीक वैसे ही जैसे कि जो लोग उन्हें नगर के मार्ग में यात्रा करते हुए देखेंगे, उनके लिए भी। आखिरकार, वे श्री लक्ष्मीजी के प्रियतम और सभी दिव्य गुणों के आगार हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.39: अक्रूर द्वारा दर्शन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 39: अक्रूर द्वारा दर्शन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  10.39.25 
अद्य ध्रुवं तत्र द‍ृशो भविष्यते
दाशार्हभोजान्धकवृष्णिसात्वताम् ।
महोत्सव: श्रीरमणं गुणास्पदं
द्रक्ष्यन्ति ये चाध्वनि देवकीसुतम् ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
जब दाशार्ह, भोज, अन्धक, वृष्णि और सात्वत लोग मथुरा में देवकी के पुत्र को देखेंगे तो निश्चित ही उनके नेत्रों के लिए एक महान उत्सव होगा, ठीक वैसे ही जैसे कि जो लोग उन्हें नगर के मार्ग में यात्रा करते हुए देखेंगे, उनके लिए भी। आखिरकार, वे श्री लक्ष्मीजी के प्रियतम और सभी दिव्य गुणों के आगार हैं।
 
When Dasharha, Bhoja, Andhaka, Vrishni and Satvatas see Devaki's son in Mathura, it will be a great feast for their eyes as well as for those who see him while traveling on the roads of the city. After all, he is the beloved of Sri Lakshmi and the repository of all divine qualities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)