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bhagavat 10.39.14: कुछ गोपिकाओं के हृदय में इतनी पीड़ा थी कि वे सिसकियाँ लेने लगीं और उनके चेहरे पीले पड़ गए। अन्य गोपिकाओं का दुख इतना अधिक था कि उनके वस्त्र, बाजूबंद और जूड़े ढीले पड़ गए।   |   bhagavat अध्याय 10.39: अक्रूर द्वारा दर्शन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 39: अक्रूर द्वारा दर्शन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.39.14 
काश्चित्तत्कृतहृत्तापश्वासम्‍लानमुखश्रिय: ।
स्रंसद्दुकूलवलयकेशग्रन्थ्यश्च काश्चन ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
कुछ गोपिकाओं के हृदय में इतनी पीड़ा थी कि वे सिसकियाँ लेने लगीं और उनके चेहरे पीले पड़ गए। अन्य गोपिकाओं का दुख इतना अधिक था कि उनके वस्त्र, बाजूबंद और जूड़े ढीले पड़ गए।
 
Some of the gopis felt so much pain in their hearts that their faces turned pale from sobbing. Other gopis were so afflicted that their clothes, armlets and braids became loose.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)