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bhagavat 10.38.8: उनके चरणकमलों की पूजा ब्रह्मा, शिव और अन्य सभी देवताओं, लक्ष्मीजी और महान ऋषियों और वैष्णवों द्वारा की जाती है। भगवान अपने साथियों के साथ गायों को चराते समय उन्हीं चरणों से जंगल में विचरण करते हैं और उनके चरण गोपियों के स्तनों पर लगे कुंकुम से सजे रहते हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.38: वृन्दावन में अक्रूर का आगमन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 38: वृन्दावन में अक्रूर का आगमन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.38.8 
यदर्चितं ब्रह्मभवादिभि: सुरै:
श्रिया च देव्या मुनिभि: ससात्वतै: ।
गोचारणायानुचरैश्चरद्वने
यद् गोपिकानां कुचकुङ्कुमाङ्कितम् ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
उनके चरणकमलों की पूजा ब्रह्मा, शिव और अन्य सभी देवताओं, लक्ष्मीजी और महान ऋषियों और वैष्णवों द्वारा की जाती है। भगवान अपने साथियों के साथ गायों को चराते समय उन्हीं चरणों से जंगल में विचरण करते हैं और उनके चरण गोपियों के स्तनों पर लगे कुंकुम से सजे रहते हैं।
 
Brahma, Shiva and all other gods, Lakshmiji, great sages and Vaishnavas worship those very feet. With those very feet, God roams in the forest with his companions while grazing the cows and those very feet remain smeared with the kumkum applied on the breasts of the gopis.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)