श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 38: वृन्दावन में अक्रूर का आगमन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.38.6 
ममाद्यामङ्गलं नष्टं फलवांश्चैव मे भव: ।
यन्नमस्ये भगवतो योगिध्येयाङ्‍‍‍‍‍घ्रिपङ्कजम् ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
आज मेरे सारे पापों का नाश हो गया है और मेरा जन्म सफल हो गया है, क्योंकि मैं भगवान के उन चरणकमलों को प्रणाम करूँगा, जिनका ध्यान बड़े-बड़े योगी भी करते हैं।
 
Today, all my sins have been eradicated and my birth has become successful because I will bow to the Lord's lotus feet which are meditated upon by great Yogis.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)