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bhagavat 10.38.28-33: तब अक्रूर ने कृष्ण और बलराम को व्रज गाँव में गायों को दूध देने के लिए जाते हुए देखा। कृष्ण ने पीले और बलराम ने नीले वस्त्रों को पहना था। उनकी आँखें शरद ऋतु के कमलों की तरह थीं। दोनों ही बलशाली युवाओं में से एक का रंग साँवला और दूसरे का रंग गोरा था, जो माँ लक्ष्मी के आश्रय हैं। अच्छी विशेषताओं वाले चेहरे के साथ वे सभी व्यक्तियों में सबसे सुंदर थे। वे युवा हाथियों के चाल से चल रहे थे और दयालु मुस्कान के साथ चारों ओर देख रहे थे। उन दोनों श्रेष्ठ व्यक्तित्वों ने अपने चरणों के चिह्नों से चरागाह को सुशोभित किया, जिनके निशान झंडे, वज्र, हाथी के अंकुश और कमल के थे। दोनों भगवान, जिनके लीलाएँ बहुत ही उदार और आकर्षक हैं, एक मणि जड़ित हार और फूलों की माला से अलंकृत थे, शुभ और सुगंधित पदार्थों से अभिषेक किया गया था, अभी-अभी स्नान किया था और साफ-सुथरे वस्त्र पहने थे। वे आदि महापुरुष थे, और ब्रह्मांडों के मूल कारण थे, जिन्होंने अब पृथ्वी के कल्याण के लिए केशव और बलराम के रूप में अवतार लिया था। हे राजा परीक्षित, वे दोनों दो सोने से बने पर्वतों के समान लग रहे थे, जिनमें से एक पन्ना था और दूसरा चाँदी का था, क्योंकि वे अपने तेज से सभी दिशाओं में आकाश के अंधकार को दूर कर रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 10.38: वृन्दावन में अक्रूर का आगमन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 38: वृन्दावन में अक्रूर का आगमन  »  श्लोक 28-33
 
 
श्लोक  10.38.28-33 
ददर्श कृष्णं रामं च व्रजे गोदोहनं गतौ ।
पीतनीलाम्बरधरौ शरदम्बुरुहेक्षणौ ॥ २८ ॥
किशोरौ श्यामलश्वेतौ श्रीनिकेतौ बृहद्भ‍ुजौ ।
सुमुखौ सुन्दरवरौ बलद्विरदविक्रमौ ॥ २९ ॥
ध्वजवज्राङ्कुशाम्भोजैश्चिह्नितैरङ्‍‍‍‍‍घ्रिभिर्व्रजम् ।
शोभयन्तौ महात्मानौ सानुक्रोशस्मितेक्षणौ ॥ ३० ॥
उदाररुचिरक्रीडौ स्रग्विणौ वनमालिनौ ।
पुण्यगन्धानुलिप्ताङ्गौ स्‍नातौ विरजवाससौ ॥ ३१ ॥
प्रधानपुरुषावाद्यौ जगद्धेतू जगत्पती ।
अवतीर्णौ जगत्यर्थे स्वांशेन बलकेशवौ ॥ ३२ ॥
दिशो वितिमिरा राजन्कुर्वाणौ प्रभया स्वया ।
यथा मारकत: शैलो रौप्यश्च कनकाचितौ ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
तब अक्रूर ने कृष्ण और बलराम को व्रज गाँव में गायों को दूध देने के लिए जाते हुए देखा। कृष्ण ने पीले और बलराम ने नीले वस्त्रों को पहना था। उनकी आँखें शरद ऋतु के कमलों की तरह थीं। दोनों ही बलशाली युवाओं में से एक का रंग साँवला और दूसरे का रंग गोरा था, जो माँ लक्ष्मी के आश्रय हैं। अच्छी विशेषताओं वाले चेहरे के साथ वे सभी व्यक्तियों में सबसे सुंदर थे। वे युवा हाथियों के चाल से चल रहे थे और दयालु मुस्कान के साथ चारों ओर देख रहे थे। उन दोनों श्रेष्ठ व्यक्तित्वों ने अपने चरणों के चिह्नों से चरागाह को सुशोभित किया, जिनके निशान झंडे, वज्र, हाथी के अंकुश और कमल के थे। दोनों भगवान, जिनके लीलाएँ बहुत ही उदार और आकर्षक हैं, एक मणि जड़ित हार और फूलों की माला से अलंकृत थे, शुभ और सुगंधित पदार्थों से अभिषेक किया गया था, अभी-अभी स्नान किया था और साफ-सुथरे वस्त्र पहने थे। वे आदि महापुरुष थे, और ब्रह्मांडों के मूल कारण थे, जिन्होंने अब पृथ्वी के कल्याण के लिए केशव और बलराम के रूप में अवतार लिया था। हे राजा परीक्षित, वे दोनों दो सोने से बने पर्वतों के समान लग रहे थे, जिनमें से एक पन्ना था और दूसरा चाँदी का था, क्योंकि वे अपने तेज से सभी दिशाओं में आकाश के अंधकार को दूर कर रहे थे।
 
Thereafter, Akrura saw Krishna and Balarama going to milk the cows in Vraja-grama. Krishna was dressed in yellow and Balarama in blue. Their eyes were like autumn lotuses. Of these two strong-armed, Lakshmi's patrons, one was dark blue and the other was white. Both of them were the most beautiful of all persons. As they walked with the gait of young elephants, beautifying the pasture with their kind smiles, these two great men adorned the pasture with their footprints. These footprints were marked with the signs of flag, thunderbolt, goad and lotus. These two lords, most generous and endowed with attractive pastimes, were wearing jeweled necklaces and flower garlands, their bodies were smeared with auspicious aromatic substances. They had just returned from bathing and were wearing clean clothes. These primeval great men and the primeval causes of the universe had now incarnated as Keshava and Balarama for the welfare of the earth. O King Parīkṣit, they both looked like two gold-adorned mountains, one of which was made of emerald and the other of silver, as they dispelled the darkness of the sky in all directions with their brilliance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)