समोहं सर्वभूतेषु
न मे द्वेष्योस्ति न प्रिय:
ये भजन्ति तु माम भक्त्या
मयि ते तेषु चाप्य अहम्
"मेरी किसी से कोई ईर्ष्या नहीं है, मेरा किसी के प्रति पक्षपात नहीं है। मैं सभी के लिए समान हूँ। परन्तु जो कोई भी मुझे भक्ति से सेवा अर्पित करता है वह एक दोस्त है और मुझ में है, और मैं भी उसके लिए एक दोस्त हूँ।"
इसी तरह, जो लोग उनसे ईर्ष्या करते थे उनके लिए भगवान चैतन्य वज्र की तरह कठोर थे, और जो लोग उनके दिव्य मिशन को समझते थे उनके लिए गुलाब की तरह कोमल थे।
