उस कमल जैसे हाथ को अपना दान देकर पुरन्दर और बलि ने स्वर्गराज इंद्र की पदवी प्राप्त की और रास –नृत्य के अंतरंग आनंद के समय जब भगवान ने गोपियों के पसीने को पोंछ कर उनकी थकान दूर की तब उनके मुख-स्पर्श ने उस हाथ को फूल की तरह सुगंधित बना दिया।
By offering alms in that lotus-like hand, Purandara and Bali attained the position of Indra, the King of heaven. And during the blissful pastimes of Rasa-nritya, when the Lord wiped away the sweat of the Gopis and removed their fatigue, the touch of His mouth made that hand fragrant like a sweet flower.
तात्पर्य
पुराणों में मानस-सरवर झील में पाए जाने वाले कमल को सौगंधिका कहा गया है। भगवान कृष्ण के कमल हाथ ने गोपियों के सुंदर मुखड़े से स्पर्श करने के कारण इस फूल की सुगंध ग्रहण कर ली थी। यह विशिष्ट घटना, जो रास-लीला के दौरान हुई थी, दशम स्कंध के तैंतीसवें अध्याय में वर्णित है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥