श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 38: वृन्दावन में अक्रूर का आगमन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  10.38.13 
स चावतीर्ण: किल सात्वतान्वये
स्वसेतुपालामरवर्यशर्मकृत् ।
यशो वितन्वन् व्रज आस्त ईश्वरो
गायन्ति देवा यदशेषमङ्गलम् ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
वही भगवान् सात्वत वंश में अवतरित हुए हैं ताकि प्रमुख देवताओं को प्रसन्न किया जा सके, जो उनके द्वारा बनाए गए धर्म के नियमों का पालन करते हैं। वे वृन्दावन में रहकर अपनी कीर्ति का विस्तार करते हैं, जिसकी महिमा देवता गाते हैं और जो सभी के लिए शुभ होती है।
 
The same God has incarnated in the Satvat clan to please the chief gods, who follow the rules of the religion created by him. While living in Vrindavan, he spreads his glory, which is sung by the gods and which bestows good fortune on everyone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)