Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.37.8: महाबाहु कृष्ण ने अपनी भुजा केशी के शरीर से निकाल ली, जो अब एक लंबी ककड़ी जैसा दिखाई दे रहा था। अपने शत्रु को सहजता से मारने के बाद भी किसी प्रकार का गर्व प्रदर्शित किए बिना भगवान ने देवताओं द्वारा ऊपर से बरसाए गए फूलों की पूजा स्वीकार की। | bhagavat अध्याय 10.37: केशी तथा व्योम असुरों का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाबाहु कृष्ण ने अपनी भुजा केशी के शरीर से निकाल ली, जो अब एक लंबी ककड़ी जैसा दिखाई दे रहा था। अपने शत्रु को सहजता से मारने के बाद भी किसी प्रकार का गर्व प्रदर्शित किए बिना भगवान ने देवताओं द्वारा ऊपर से बरसाए गए फूलों की पूजा स्वीकार की।
Mahabahu Krishna withdrew His arm from the body of Kesi which now looked like a long cucumber. Without showing any kind of pride after killing His enemy effortlessly, the Lord accepted the worship of the demigods in the form of a shower of flowers from above.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥