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श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 37: केशी तथा व्योम असुरों का वध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.37.7 
समेधमानेन स कृष्णबाहुना
निरुद्धवायुश्चरणांश्च विक्षिपन् ।
प्रस्विन्नगात्र: परिवृत्तलोचन:
पपात लण्डं विसृजन् क्षितौ व्यसु: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही कृष्ण की विस्तारशील भुजा ने केशी का श्वास पूर्णतया अवरुद्ध कर दिया, उसके पैर भड़कने लगे, उसका शरीर पसीने से लथपथ हो गया और उसकी आंखें ऊपर लुढ़कने लगीं। तब उस राक्षस ने मल-मूत्र त्याग दिया और भूमि पर गिर कर मृत हो गया।
 
As soon as Krishna's outstretched arm completely blocked Kesi's breathing, he began stamping his feet, his body became covered in sweat, and his eyes rolled back. Then the demon defecated and fell to the ground, lifeless.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)