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bhagavat 10.37.29: धीरे-धीरे उस महा दानव ने अधिक से अधिक ग्वाल-बालकों का अपहरण कर लिया और उन्हें एक पर्वत की गुफा में ले जाकर बंद कर दिया और उसके द्वार को एक बड़े पत्थर से बंद कर दिया। अंत में, खेल में केवल चार-पाँच बालक ही बचे थे जो भेड़ का किरदार निभा रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 10.37: केशी तथा व्योम असुरों का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 37: केशी तथा व्योम असुरों का वध  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  10.37.29 
गिरिदर्यां विनिक्षिप्य नीतं नीतं महासुर: ।
शिलया पिदधे द्वारं चतु:पञ्चावशेषिता: ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
धीरे-धीरे उस महा दानव ने अधिक से अधिक ग्वाल-बालकों का अपहरण कर लिया और उन्हें एक पर्वत की गुफा में ले जाकर बंद कर दिया और उसके द्वार को एक बड़े पत्थर से बंद कर दिया। अंत में, खेल में केवल चार-पाँच बालक ही बचे थे जो भेड़ का किरदार निभा रहे थे।
 
That great demon gradually kidnapped more and more cowherds and threw them in a mountain cave and closed its door with a big stone. In the end only four-five children survived who had become sheep in the game.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)