Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.37.23: हे परमेश्वर, मैं आपको प्रणाम करता हूँ, जो अपने आप में पूर्ण हैं और किसी पर निर्भर नहीं हैं। अपनी शक्ति से आपने इस विशाल ब्रह्मांड का निर्माण किया है। अब आप यदुओं, वृष्णियों और सात्वतों के बीच सबसे महान योद्धा के रूप में अवतरित हुए हैं और मानव युद्ध में भाग लेने का निर्णय लिया है। | bhagavat अध्याय 10.37: केशी तथा व्योम असुरों का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे परमेश्वर, मैं आपको प्रणाम करता हूँ, जो अपने आप में पूर्ण हैं और किसी पर निर्भर नहीं हैं। अपनी शक्ति से आपने इस विशाल ब्रह्मांड का निर्माण किया है। अब आप यदुओं, वृष्णियों और सात्वतों के बीच सबसे महान योद्धा के रूप में अवतरित हुए हैं और मानव युद्ध में भाग लेने का निर्णय लिया है।
O self-sufficient supreme controller, I offer my obeisances unto You. By Your power You have created the infinitely perfect order of this universe. Now You have appeared as the greatest hero among the Yadus, Vrishnis and Satvatas and have decided to take part in the human war.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥