Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.37.22: हे भगवान, हम आपकी शरण में आना चाहते हैं। आप पूर्णतया शुद्ध चेतना से परिपूर्ण हैं और हमेशा अपने मूल स्वरूप में रहते हैं। आपकी कोई भी इच्छा विफल नहीं हो सकती, तो आपने वांछित वस्तुएं प्राप्त कर ली हैं और अपनी आध्यात्मिक शक्ति के माध्यम से आप माया के गुणों से सर्वदा दूर रहते हैं। | bhagavat अध्याय 10.37: केशी तथा व्योम असुरों का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे भगवान, हम आपकी शरण में आना चाहते हैं। आप पूर्णतया शुद्ध चेतना से परिपूर्ण हैं और हमेशा अपने मूल स्वरूप में रहते हैं। आपकी कोई भी इच्छा विफल नहीं हो सकती, तो आपने वांछित वस्तुएं प्राप्त कर ली हैं और अपनी आध्यात्मिक शक्ति के माध्यम से आप माया के गुणों से सर्वदा दूर रहते हैं।
O Lord, allow us to surrender to You. You are full of pure spiritual knowledge and are always situated in Your original nature. Since Your will can never be denied, You have already obtained all that You desired and by Your spiritual potency You are always detached from the material flow of Maya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥