श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 36: वृषभासुर अरिष्ट का वध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.36.8 
इत्यास्फोत्याच्युतोऽरिष्टं तलशब्देन कोपयन् ।
सख्युरंसे भुजाभोगं प्रसार्यावस्थितो हरि: ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
ये शब्द कहकर अच्युत भगवान् हरि जी ने अपनी हथेलियों से अपनी बाँह पर एक जोरदार थपकी दी, जिससे होने वाली आवाज़ से अरिष्ट और भी क्रोधित हो उठा। तब भगवान् ने जैसे कोई साधारण बात हो वैसा ही अपनी बलशाली, साँप जैसी भुजा को अपने एक साथी के कंधे पर रख दिया और राक्षस की ओर मुँह करके खड़े हो गए।
 
Having said these words, the infallible Lord Hari struck his arms with his palms, which made a loud sound which further enraged Arishta. Then the Lord placed his powerful serpent-like arm on the shoulder of one of his friends and stood facing the demon.
तात्पर्य
भगवान कृष्ण ने अपने अज्ञानी राक्षस के प्रति अपनी घृणा दिखाई।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)