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bhagavat 10.36.34: मैं अपने बूढ़े पिता उग्रसेन को भी मार डालूँगा, जो मेरे राज्य के लिए ललचाते हैं, और मैं उसके भाई देवक और अपने बाकी सभी शत्रुओं को भी मार डालूँगा।   |   bhagavat अध्याय 10.36: वृषभासुर अरिष्ट का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 36: वृषभासुर अरिष्ट का वध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.36.34 
उग्रसेनं च पितरं स्थविरं राज्यकामुकं ।
तद्भ्रातरं देवकं च ये चान्ये विद्विषो मम ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने बूढ़े पिता उग्रसेन को भी मार डालूँगा, जो मेरे राज्य के लिए ललचाते हैं, और मैं उसके भाई देवक और अपने बाकी सभी शत्रुओं को भी मार डालूँगा।
 
I will also kill my old father Ugrasen because he is greedy for my empire. I will also kill his brother Devak and all my other enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)