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bhagavat 10.36.29: हे भद्र अक्रूर, आप हमेशा अपने कर्तव्यों को गंभीरता से निभाते हैं, इसलिए मैं आप पर उसी तरह भरोसा करता हूं जैसे शक्तिशाली इंद्र ने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु की शरण ली थी।   |   bhagavat अध्याय 10.36: वृषभासुर अरिष्ट का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 36: वृषभासुर अरिष्ट का वध  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  10.36.29 
अतस्त्वामाश्रित: सौम्य कार्यगौरवसाधनम् ।
यथेन्द्रो विष्णुमाश्रित्य स्वार्थमध्यगमद् विभु: ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
हे भद्र अक्रूर, आप हमेशा अपने कर्तव्यों को गंभीरता से निभाते हैं, इसलिए मैं आप पर उसी तरह भरोसा करता हूं जैसे शक्तिशाली इंद्र ने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु की शरण ली थी।
 
O noble Akrura, you are always performing your duties very seriously, and therefore I am dependent on you just as the mighty Indra depended upon Lord Vishnu to achieve his goal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)