Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.36.2: अरिष्टासुर ने ज़ोरदार गर्जना करते हुए अपने खुरों से ज़मीन को फाड़ना शुरू कर दिया। अपनी पूँछ को ऊपर उठाकर और अपनी आँखों को चमकाते हुए, वह अपने सींगों के नुकीले सिरे से बाँधों को तोड़ने लगा। इस बीच, वह थोड़ा-थोड़ा मल और मूत्र भी छोड़ता जा रहा था। | bhagavat अध्याय 10.36: वृषभासुर अरिष्ट का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रम्भमाण: खरतरं पदा च विलिखन् महीम् ।
उद्यम्य पुच्छं वप्राणि विषाणाग्रेण चोद्धरन् ।
किञ्चित्किञ्चिच्छकृन् मुञ्चन्मूत्रयन्स्तब्धलोचन: ॥ २ ॥
अनुवाद
अरिष्टासुर ने ज़ोरदार गर्जना करते हुए अपने खुरों से ज़मीन को फाड़ना शुरू कर दिया। अपनी पूँछ को ऊपर उठाकर और अपनी आँखों को चमकाते हुए, वह अपने सींगों के नुकीले सिरे से बाँधों को तोड़ने लगा। इस बीच, वह थोड़ा-थोड़ा मल और मूत्र भी छोड़ता जा रहा था।
Arishtasura roared loudly and scratched the ground with his hooves. With his tail raised and his eyes shining, he started tearing the dams with the tips of his horns and in between he also kept releasing a little urine and feces.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥