श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती बताते हैं कि जब नारद ने कांस के सामने यह जानकारी प्रकट की तो उन्होंने महान भक्त वसुदेव और देवकी के प्रति कोई शत्रुतापूर्ण कार्य नहीं किया। वास्तव में, जैसे कि ग्यारहवें सर्ग में बताया गया है, वसुदेव नारद के आभारी थे क्योंकि वह कृष्ण के हाथों कांस की मृत्यु की व्यवस्था कर रहे थे, और आगे कृष्ण के मथुरा आने और वहाँ रहने की व्यवस्था कर रहे थे, जहाँ उनके प्यारे पिता उनके साथ सम्बद्ध हो सकते थे।
