श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 36: वृषभासुर अरिष्ट का वध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  10.36.19 
निवारितो नारदेन तत्सुतौ मृत्युमात्मन: ।
ज्ञात्वा लोहमयै: पाशैर्बबन्ध सह भार्यया ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
किन्तु नारद ने कंस को स्मरण दिलाते हुए रोका कि वसुदेव नही अपितु उनके दो पुत्र ही तुम्हारी मृत्यु का कारण बनेंगे। तब कंस ने वसुदेव और उनकी पत्नी को लोहे की जंजीरों से बंदी बना लिया।
 
But Narada stopped Kansa by reminding him that not Vasudeva but his two sons will be the cause of your death. Then Kansa got Vasudeva and his wife tied with iron chains.
तात्पर्य
कांस ने समझा कि वसुदेव को मरना व्यर्थ है, क्योंकि वास्तव में उसे वसुदेव के पुत्र कृष्ण और बलराम ने मरना था। आचार्यों के अनुसार, नारद ने भी कांस को सलाह दी कि यदि वह वसुदेव को मारता है, तो दो छोटे बालक भाग सकते हैं और इसलिए उन्हें न मारना बेहतर है। बल्कि, नारद ने सिफारिश की, कांस को कृष्ण और बलराम को कांस की राजधानी मथुरा लाना चाहिए।

श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती बताते हैं कि जब नारद ने कांस के सामने यह जानकारी प्रकट की तो उन्होंने महान भक्त वसुदेव और देवकी के प्रति कोई शत्रुतापूर्ण कार्य नहीं किया। वास्तव में, जैसे कि ग्यारहवें सर्ग में बताया गया है, वसुदेव नारद के आभारी थे क्योंकि वह कृष्ण के हाथों कांस की मृत्यु की व्यवस्था कर रहे थे, और आगे कृष्ण के मथुरा आने और वहाँ रहने की व्यवस्था कर रहे थे, जहाँ उनके प्यारे पिता उनके साथ सम्बद्ध हो सकते थे।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)