श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 36: वृषभासुर अरिष्ट का वध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  10.36.17 
यशोदाया: सुतां कन्यां देवक्या: कृष्णमेव च ।
रामं च रोहिणीपुत्रं वसुदेवेन बिभ्यता ।
न्यस्तौ स्वमित्रे नन्दे वै याभ्यां ते पुरुषा हता: ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
[नारद ने कंस से कहा]: यशोदा की उत्पत्ति वस्तुत: एक कन्या की हुई थी और कृष्ण देवकी का पुत्र है। यही नहीं, रोहिणी ने राम को जन्म दिया है। वसुदेव ने भय के कारण कृष्ण और बलराम को अपने मित्र नंद महाराज को सौंप दिया और इन्हीं दोनों बालकों ने तुम्हारे आदमियों का वध किया है।
 
[Narada said to Kamsa]: Yashoda's child was actually a girl and Krishna is Devaki's son. Not only this, Rama is Rohini's son. Vasudeva, out of fear, handed Krishna and Balarama over to his friend Nanda Maharaja and these two boys have killed your men.
तात्पर्य
कंस को यह विश्वास दिलाया गया था कि कृष्ण यशोदा का पुत्र है, और देवकी की आठवीं संतान पुत्री हुई है। देवकी की आठवीं संतान की पहचान कंस के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण थी क्योंकि एक भविष्यवाणी ने बताया था कि उसकी आठवीं संतान उसे मार डालेगी। यहाँ नारद राजा को सूचित करते हैं कि देवकी की आठवीं संतान दुर्जेय कृष्ण थे, इस प्रकार यह निहित था कि भविष्यवाणी को बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह जानकारी प्राप्त करने के बाद, कंस स्पष्ट रूप से अब कृष्ण और बलराम को मारने के लिए अपनी शक्ति में सब कुछ करेगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)