जब श्रीकृष्ण अपने शुभचिन्तक सखाओं को आदरपूर्वक शुभकामनाएँ देते हैं, तो उनकी आँखें थोड़ी-सी मदिरापान से वशीभूत की तरह घूमती हैं। उन्होंने फूलों की माला पहनी है और उनके कोमल गालों की शोभा उनके सुनहरे कुण्डलों की चमक और बदर बेर के रंग वाले उनके मुख की श्वेतता से बढ़ जाती है। रात्रि के स्वामी चन्द्रमा के समान अपने प्रसन्न मुख वाले यदुपति राजसी हाथी की अदा से चल रहे हैं। इस प्रकार वे संध्या समय घर लौटते हुए अपनी गायों को दिन की गर्मी से मुक्ति दिलाते हैं।
When Sri Krishna respectfully greets His well-wishing friends, His eyes roll a little as if inebriated. He is garlanded with flowers and the beauty of His soft cheeks is enhanced by the luster of His golden earrings and the whiteness of His face, which is the color of the Badar berry. The Lord of the night, with His cheerful face like the moon, the Lord of the Yadus walks with the grace of a royal elephant. Thus He returns home in the evening, relieving the cows of Vraja from the heat of the day.
तात्पर्य
गावाम शब्द का निर्माण संस्कृत शब्द गो से हुआ है, जिसका अर्थ है “गौ” या “इंद्रियाँ”। इस प्रकार, श्रीकृष्ण ने व्रज गाँव में वापस आकर व्रन्दावन के निवासियों को उस संकट से मुक्ति दिलाई जो उनके नेत्रों और अन्य इंद्रियों को दिन में प्रत्यक्ष उनके संसर्ग से अलग रहने के कारण होता था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥