व्रज की गौवों के प्रति हद से ज़्यादा स्नेह के कारण कृष्ण गोवर्धनधर बन गए। दिन ढलने के बाद, अपनी सभी गायों को समेटते हुए वह अपनी बाँसुरी पर गीत बजाता है और उसके रास्ते के किनारे खड़े हुए महान देवता उसके चरणकमलों की पूजा करते हैं और उसके साथ चल रहे ग्वाले उसके गुणों का गुणगान करते हैं। उसकी माला गायों के खुरों से उड़ने वाली धूल से धूसरित हो गयी है और थकान से बढ़ी हुई उसकी सुंदरता हर किसी की आँखों के लिए एक खुशनुमा उत्सव प्रस्तुत कर रही है। अपने मित्रों की इच्छाओं को पूरा करने के लिए उत्सुक कृष्ण, माँ यशोदा के उदर से निकले हुए चंद्रमा के समान है।
Krishna became the bearer of Govardhana because of his great affection for the cows of Vraja. At dusk, having gathered all His cows, He plays a song on His flute, and the exalted deities standing along His path worship His lotus feet, and the cowherd boys accompanying Him sing His glories. His garland is dusted with the dust raised by the cows' hooves, and His beauty, enhanced by fatigue, is a feast for everyone's eyes. Eager to fulfill the desires of His friends, Krishna is the moon rising from the womb of Mother Yashoda.
तात्पर्य
आचार्यों के अनुसार, इस बिन्दु पर गोपियाँ वृन्दावन के मकानों की निगरानी करने वाले मीनारों पर चढ़ गईं ताकि कृष्ण के घर लौटने के साथ ही उन्हें शीघ्र से शीघ्र देखा जा सके। माता यशोदा अपने बेटे के लौटने को लेकर बेहद उत्सुक थीं और इसलिए उन्होंने घर की सबसे ऊंची और खूबसूरत युवा गोपियों से चढ़कर यह देखने को कहा कि वह कब आयेंगे। यहाँ यह संकेत दिया गया है कि कृष्ण कुछ देर से घर इसलिए पहुंचे क्योंकि महान देवतागण रास्ते में उनके चरण कमलों की पूजा कर रहे थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥