Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.35.12-13: हे व्रज की देवियो, जब कृष्ण बलराम के साथ पर्वत की ढालों पर विहार करते हैं और खेलखेल में अपने सिर पर फूलों की माला धारण करते हैं, तो वे अपनी वंशी की मधुर ध्वनि से सबों का मन मोह लेते हैं। इस तरह वे सम्पूर्ण विश्व को आनंदित करते हैं। उस समय महान पुरुष के अप्रसन्न होने के भय से बादल भी मंद मंद गर्जना करता है। वह बादल अपने प्रिय मित्र कृष्ण पर फूल बरसाता है और धूप से बचाने के लिए छाते की तरह छाया प्रदान करता है। | bhagavat अध्याय 10.35: कृष्ण के वनविहार के समय गोपियों द्वारा कृष्ण का गायन । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सहबल: स्रगवतंसविलास:
सानुषु क्षितिभृतो व्रजदेव्य: ।
हर्षयन् यर्हि वेणुरवेण
जातहर्ष उपरम्भति विश्वम् ॥ १२ ॥
महदतिक्रमणशङ्कितचेता
मन्दमन्दमनुगर्जति मेघ: ।
सुहृदमभ्यवर्षत् सुमनोभि-
श्छायया च विदधत् प्रतपत्रम् ॥ १३ ॥
अनुवाद
हे व्रज की देवियो, जब कृष्ण बलराम के साथ पर्वत की ढालों पर विहार करते हैं और खेलखेल में अपने सिर पर फूलों की माला धारण करते हैं, तो वे अपनी वंशी की मधुर ध्वनि से सबों का मन मोह लेते हैं। इस तरह वे सम्पूर्ण विश्व को आनंदित करते हैं। उस समय महान पुरुष के अप्रसन्न होने के भय से बादल भी मंद मंद गर्जना करता है। वह बादल अपने प्रिय मित्र कृष्ण पर फूल बरसाता है और धूप से बचाने के लिए छाते की तरह छाया प्रदान करता है।
O goddesses of Vraja, when Krishna and Balarama playfully wander on the slopes of the mountain wearing garlands of flowers on their heads, He delights everyone with the resounding sound of His flute. In this way He delights the entire universe. At that time, fearing that the great man may be displeased, a nearby cloud roars softly along with Him. This cloud showers flowers on His dear friend Krishna and provides shade like an umbrella to protect Him from the sun.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥