Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.34.7: जब ग्वालों ने नंद की चीखें सुनीं तो वे तुरंत उठे और उन्होंने देखा कि नंद को एक सर्प निगल रहा है। इस दृश्य से वे अत्यंत विचलित हो गए और उन्होंने जलती मशालों से उस सर्प को पीटना शुरू कर दिया। | bhagavat अध्याय 10.34: नन्द महाराज की रक्षा तथा शंखचूड़ का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्य चाक्रन्दितं श्रुत्वा गोपाला: सहसोत्थिता: ।
ग्रस्तं च दृष्ट्वा विभ्रान्ता: सर्पं विव्यधुरुल्मुकै: ॥ ७ ॥
अनुवाद
जब ग्वालों ने नंद की चीखें सुनीं तो वे तुरंत उठे और उन्होंने देखा कि नंद को एक सर्प निगल रहा है। इस दृश्य से वे अत्यंत विचलित हो गए और उन्होंने जलती मशालों से उस सर्प को पीटना शुरू कर दिया।
When the cowherds heard Nanda's screams, they immediately got up and saw that Nanda was being swallowed by a snake. Extremely perturbed, they beat the snake with burning torches.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥