Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.34.6: साँप के चंगुल में फँसे हुए नंद महाराज ने चिल्लाकर कहा, "कृष्ण! बेटे कृष्ण! यह विशालकाय सर्प मुझे निगल रहा है। मैं तो तुम्हारा शरण में आया हूँ। मुझे बचाओ।" | bhagavat अध्याय 10.34: नन्द महाराज की रक्षा तथा शंखचूड़ का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चुक्रोशाहिना ग्रस्त: कृष्ण कृष्ण महानयम् ।
सर्पो मां ग्रसते तात प्रपन्नं परिमोचय ॥ ६ ॥
अनुवाद
साँप के चंगुल में फँसे हुए नंद महाराज ने चिल्लाकर कहा, "कृष्ण! बेटे कृष्ण! यह विशालकाय सर्प मुझे निगल रहा है। मैं तो तुम्हारा शरण में आया हूँ। मुझे बचाओ।"
Nanda Maharaja, trapped in the snake's clutches, cried out, "Krishna! Son Krishna! This huge snake is swallowing me. I have taken refuge in you. Save me."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥