शंखचूड़ दैत्य का वध करने के बाद और उसकी चमकदार मणि को ले जाने के बाद, भगवान कृष्ण ने इसे बड़ी संतुष्टि के साथ अपने बड़े भाई को भेंट किया, जबकि गोपियाँ इस दृश्य को देख रही थीं।
Thus, after killing the demon Shankhachud and taking his shining gem, Lord Krishna presented it to his elder brother in front of the gopis with great joy.
तात्पर्य
विभिन्न गोपियों को शायद यह लगा कि गोविंदा उनमें से किसी को बहुमूल्य आभूषण देंगे। उनके बीच प्रतिद्वंदिता को रोकने के लिए, श्री कृष्ण ने वह आभूषण अपने बड़े भाई बलराम को खुशी-खुशी दे दिया।
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत चौंतीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥