Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.34.17: हे अच्युत, मैं केवल तुम्हें देखकर ब्राह्मणों के दंड से शीघ्र ही मुक्त हो गया। तुम्हारे नाम का उच्चारण करनेवाला हर कोई अपने साथ-साथ उसे सुनने वालों को भी पवित्र कर देता है। तब फिर तुम्हारे चरणकमलों का स्पर्श कितना लाभकारी होगा? | bhagavat अध्याय 10.34: नन्द महाराज की रक्षा तथा शंखचूड़ का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मदण्डाद्विमुक्तोऽहं सद्यस्तेऽच्युत दर्शनात् ।
यन्नाम गृह्णन्नखिलान् श्रोतृनात्मानमेव च ।
सद्य: पुनाति किं भूयस्तस्य स्पृष्ट: पदा हि ते ॥ १७ ॥
अनुवाद
हे अच्युत, मैं केवल तुम्हें देखकर ब्राह्मणों के दंड से शीघ्र ही मुक्त हो गया। तुम्हारे नाम का उच्चारण करनेवाला हर कोई अपने साथ-साथ उसे सुनने वालों को भी पवित्र कर देता है। तब फिर तुम्हारे चरणकमलों का स्पर्श कितना लाभकारी होगा?
O Achyuta, I was instantly freed from the punishments of the brahmanas by merely seeing you. Whoever chants your name purifies himself as well as his listeners. Then who knows how beneficial the touch of your lotus feet will be?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥