हे प्रभु, इस भौतिक दुनिया के भय से आपकी शरण लेने वाले सभी लोगों का भय दूर करने वाले आप ही हैं। आपके चरणों के स्पर्श से मैं ऋषियों के शाप से मुक्त हो गया हूँ। हे दुखहर्ता, अब मुझे अपने लोक वापस जाने की अनुमति प्रदान करें।
O Lord, you are the destroyer of all fears of all those who seek refuge in you out of fear of this material world. Now I am freed from the curses of the sages by the touch of your feet. O Dukhbhanjana, now allow me to return to my own world.
तात्पर्य
आचार्यों के अनुसार, आपृच्छे शब्द इंगित करता है कि सुदर्शन ने भगवान से विनम्रतापूर्वक अपने निवास स्थान पर लौटने की अनुमति का अनुरोध किया, जहाँ वह निश्चित रूप से एक दंडनीय मनःस्थिति में अपने कर्तव्यों को फिर से शुरू कर सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥