श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 33: रास नृत्य  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.33.7 
पादन्यासैर्भुजविधुतिभि: सस्मितैर्भ्रूविलासै-
र्भज्यन्मध्यैश्चलकुचपटै: कुण्डलैर्गण्डलोलै: ।
स्विद्यन्मुख्य: कवररसनाग्रन्थय: कृष्णवध्वो
गायन्त्यस्तं तडित इव ता मेघचक्रे विरेजु: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
जब गोपियाँ कृष्ण की प्रशंसा में गाती थीं, तो उनके पैर स्वयं थिरकने लगते थे, उनके हाथ स्वयं ही इशारे करने लगते थे और उनकी भौंहें हँसी की छटा बिखेरती थीं। जिसकी वेणियाँ बंधी थीं, कमर में कसकर पेटी बंधी थी, कमर लचीली थी, जिसके चेहरे पर पसीना झलक रहा था, वक्षस्थल पर वस्त्र उड़ रहा था और गालों पर झुमके हिल रहे थे, कृष्ण की वे प्रेमिकाएँ बादलों के बीच चमकती हुई बिजली की तरह थीं।
 
When the gopis sang in praise of Krishna, their feet danced, their hands gestured and their eyebrows wiggled with laughter. With their braids and waist belts tied tightly, their waistbands swaying, their faces glistening with beads of sweat, their breasts swaying and their earrings dancing on their cheeks, these young beloveds of Krishna shone like flashes of lightning in a cloud.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामीजी समझाते हैं कि जैसे बादलों में चमकती बिजली से सादृश्य निकलता है, उसी तरह गोपियों के मनोहर चेहरों पर पसीने की बूँदें कोहरे की बूंदों जैसी लगती थीं और उनका गायन गरज जैसा प्रतीत होता था। 'आग्रंथयः' शब्द को 'अग्रंथयः' भी पढ़ा जा सकता है, जिसका अर्थ है "ढीला हुआ"। इससे पता चलता है कि यद्यपि गोपियों ने नृत्य की शुरुआत अपने बाल और बेल्ट को कसकर खींचकर की थी, लेकिन धीरे-धीरे यह ढीला हो गया|

श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती बताते हैं कि गोपियाँ मुद्राओं (उंगलियों से बनने वाले सटीक हाव-भाव जो भावनाओं या अभिनय से जुड़ें अर्थों को व्यक्त करते हैं) को प्रदर्शित करने में निपुण थीं। इस प्रकार कई बार कृष्ण और गोपियाँ आपस में अपने बँधे हुए हाथों को कलात्मक रूप से एक साथ हिलाते थे, और कई बार वे हाथों को अलग करके गाने के अर्थ को अभिनय करने के लिए मुद्राएँ प्रदर्शित करते थे|

'पाद-न्यासैः' शब्द इंगित करता है कि गोपियाँ अपने नृत्य के पैरों की चाल को एक आकर्षक ढंग से कलात्मक और शालीनता से रखती थीं, और 'स-स्मितैः भ्रू-विलासैः' शब्द बताते हैं कि प्रेम से मुस्कुराती हुई उनकी भौंहों की रोमांटिक हरकतें देखने में बहुत ही मनोहारी थीं|

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)