श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 33: रास नृत्य  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.33.6 
तत्रातिशुशुभे ताभिर्भगवान् देवकीसुत: ।
मध्ये मणीनां हैमानां महामरकतो यथा ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
नृत्यरत गोपियों की भीड़ में प्रभु कृष्ण सपने जैसी नीलमणि के समान सुशोभित हो रहे थे, जैसे स्वर्ण आभूषणों के बीच पन्ना अपने तेज से चमकता है।
 
नृत्यरत गोपियों की भीड़ में प्रभु कृष्ण सपने जैसी नीलमणि के समान सुशोभित हो रहे थे, जैसे स्वर्ण आभूषणों के बीच पन्ना अपने तेज से चमकता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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