एवं प्रभोः प्रियाणां च
धाम्नश्च समयासस्य च
अविचिंत्य-प्रभावत्वाद
अत्र किंचिन न दुर्घटम्
"प्रभु, उनके प्रिय भक्तों, उनके अलौकिक निवास या उनके मनोरंजन के समय के लिए कुछ भी असंभव नहीं है, क्योंकि ये सभी अविश्वसनीय रूप से शक्तिशाली हैं।"
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती आगे बताते हैं कि शब्द वासुदेवानुमोदिताह इंगित करता है कि भगवान कृष्ण ने गोपियों को सलाह दी, "इन मनोरंजनों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए, आपको और मुझे उन्हें गुप्त रखना चाहिए।" कृष्ण का एक नाम वासुदेव, कृष्ण के पूर्ण विस्तार का भी संकेत देता है जो चेतना के अध्यक्ष देवता के रूप में कार्य करता है। जब वासुदेव शब्द को इस संदर्भ में समझा जाता है, तो वासुदेवानुमोदिताह शब्द इंगित करता है कि चेतना के अध्यक्ष देवता, वासुदेव, ने गोपियों के दिलों में अपने बड़ों के प्रति शर्मिंदगी और डर प्रकट किया, और इसलिए यह केवल बड़ी अनिच्छा के साथ था कि युवा लड़कियाँ घर लौटी थीं।
