श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 33: रास नृत्य  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  10.33.38 
ब्रह्मरात्र उपावृत्ते वासुदेवानुमोदिता: ।
अनिच्छन्त्यो ययुर्गोप्य: स्वगृहान्भगवत्प्रिया: ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
जब ब्रह्मा की एक पूरी रात बीत गई, तो श्री कृष्ण ने गोपियों को अपने घरों को लौट जाने के लिए कहा। यद्यपि वे ऐसा नहीं करना चाहती थीं, लेकिन भगवान् की उन प्रियाओं ने उनके आदेश का पालन किया।
 
When one full night of Brahma had passed, Krishna advised the gopis to return to their homes. Even though they did not want to do so, these beloveds of the Lord obeyed His command.
तात्पर्य
भगवद्-गीता (8.17) में भगवान कृष्ण समझाते हैं, "मानवीय गणना के अनुसार, एक हजार युग मिलकर ब्रह्मा के एक दिन के बराबर होते हैं और उनकी रात भी इतनी ही लंबी होती है।" इस प्रकार एक हजार युग एक बारह घंटे की रात में समा गए थे जब भगवान कृष्ण ने अपना रास नृत्य किया था। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती इस अविश्वसनीय समय धारणा की तुलना इस तथ्य से करते हैं कि कई ब्रह्मांड सांसारिक वृंदावन की चालीस मील की सीमा में आसानी से समा जाते हैं। या फिर यह सोचा जा सकता है कि माता यशोदा बाल कृष्ण के छोटे से पेट को कई रस्सियों से भी घेर नहीं सकती थीं, और एक अन्य समय में उन्होंने अपने मुँह में कई ब्रह्मांड प्रकट किए थे। सांसारिक भौतिकी से परे आध्यात्मिक वास्तविकता की श्रेष्ठता को श्रील रूप गोस्वामी के लघु-भागवतामृत में संक्षेप में समझाया गया है:

एवं प्रभोः प्रियाणां च

धाम्नश्च समयासस्य च

अविचिंत्य-प्रभावत्वाद

अत्र किंचिन न दुर्घटम्

"प्रभु, उनके प्रिय भक्तों, उनके अलौकिक निवास या उनके मनोरंजन के समय के लिए कुछ भी असंभव नहीं है, क्योंकि ये सभी अविश्वसनीय रूप से शक्तिशाली हैं।"

श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती आगे बताते हैं कि शब्द वासुदेवानुमोदिताह इंगित करता है कि भगवान कृष्ण ने गोपियों को सलाह दी, "इन मनोरंजनों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए, आपको और मुझे उन्हें गुप्त रखना चाहिए।" कृष्ण का एक नाम वासुदेव, कृष्ण के पूर्ण विस्तार का भी संकेत देता है जो चेतना के अध्यक्ष देवता के रूप में कार्य करता है। जब वासुदेव शब्द को इस संदर्भ में समझा जाता है, तो वासुदेवानुमोदिताह शब्द इंगित करता है कि चेतना के अध्यक्ष देवता, वासुदेव, ने गोपियों के दिलों में अपने बड़ों के प्रति शर्मिंदगी और डर प्रकट किया, और इसलिए यह केवल बड़ी अनिच्छा के साथ था कि युवा लड़कियाँ घर लौटी थीं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)