माया-कल्पिता तद्रिक-स्त्री
शीलनेनानुसूयभीः
न जातु व्रजदेवीनां
पतिभिः सह संगमः
"गोपियों के ईर्ष्यालु पति अपनी पत्नियों के साथ नहीं, बल्कि माया द्वारा निर्मित युगल के साथ सहवास करते थे। इस प्रकार इन पुरुषों का व्रज की दिव्य महिलाओं के साथ कभी भी वास्तव में कोई अंतरंग संपर्क नहीं हुआ।" गोपियां भगवान की आंतरिक ऊर्जा हैं और वे कभी भी किसी अन्य जीव की नहीं हो सकतीं। कृष्ण ने परकीया-रस, विवाहित महिला और उसके प्रेमी के बीच प्रेम- की उत्तेजना पैदा करने के लिए दूसरे पुरुषों से उनका कथित विवाह व्यवस्थित किया। ये गतिविधियाँ पूर्ण रूप से पवित्र हैं क्योंकि वे भगवान के मनोरंजन हैं और पुरातन काल से संतों ने इन सर्वोच्च आध्यात्मिक घटनाओं का आनंद लिया है।
