जब भगवान् अपनी कृपा का प्रदर्शन करने के लिए मानव जैसा शरीर ग्रहण करते हैं, तो वे ऐसे कार्य करते हैं जिससे उन्हें सुनने वाले भक्तिमार्ग पर आकर्षित होकर समर्पित हो जाते हैं।
When the Lord takes on a human form to show His mercy to His devotees, He performs such acts that those who listen to Him are attracted and become devoted to the Lord.
तात्पर्य
इस सम्बन्ध में श्रील जीव गोस्वामी महाराज समझाते हैं कि जब भगवान कृष्ण इस संसार में अपने मूलतः दो-हाथों वाले रूप में अवतरित होते हैं तो अपनी दया से वे उस रूप का प्रकटन इस प्रकार करते हैं जिसे मानवीय समाज में स्थित उनके भक्त देख व समझ सकें। इसके कारण ही यहाँ कहा गया है, मानुषं देहमास्थितः "उन्होनें मानव जैसा शरीर धारण किया।" श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर भगवान के संयोगिक विहार की महिमा करते हुए कहते हैं कि इन रमणीय कृत्यों में इतनी अकल्पनीय आध्यात्मिक शक्ति है कि ये स्थित प्राणियों के कलुषित हृदयों को आकर्षित कर सकते हैं। यह एक निर्विवाद तथ्य है कि कोई भी शुद्ध या सात्विक हृदय वाला व्यक्ति जो कृष्ण के प्रेममय कार्यों की कथाएँ सुनता है, वह भगवान के चरण कमलों की ओर आकर्षित होगा और धीरे-धीरे उनका भक्त बन जाएगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥