श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 33: रास नृत्य  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  10.33.31 
ईश्वराणां वच: सत्यं तथैवाचरितं क्‍वचित् ।
तेषां यत् स्ववचोयुक्तं बुद्धिमांस्तत् समाचरेत् ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान द्वारा शक्ति प्रदान किए गए सेवकों के कथन सदैव सत्य होते हैं और जब वे इन वचनों के अनुरूप कर्म करते हैं, तो वे आदर्श होते हैं। अतः जो विवेकशील है, उसे उनके आदेशों का पालन करना चाहिए।
 
भगवान द्वारा शक्ति प्रदान किए गए सेवकों के कथन सदैव सत्य होते हैं और जब वे इन वचनों के अनुरूप कर्म करते हैं, तो वे आदर्श होते हैं। अतः जो विवेकशील है, उसे उनके आदेशों का पालन करना चाहिए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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