Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.33.23: हे राजन्, जल में कृष्ण चारों ओर हँसती और प्यार भरी नजरों से देखती हुई गोपियों से पानी में डुबोया जा रहा था। जैसे ही देवता अपने विमानों से उन पर फूल बरसाकर उनकी पूजा कर रहे थे, आत्म-संतुष्ट भगवान ने हाथियों के राजा की तरह खेलने का आनंद लेना शुरू कर दिया।   |   bhagavat अध्याय 10.33: रास नृत्य   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 33: रास नृत्य  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  10.33.23 
सोऽम्भस्यलं युवतिभि: परिषिच्यमान:
प्रेम्णेक्षित: प्रहसतीभिरितस्ततोऽङ्ग ।
वैमानिकै: कुसुमवर्षिभिरीड्यमानो
रेमे स्वयं स्वरतिरत्र गजेन्द्रलील: ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन्, जल में कृष्ण चारों ओर हँसती और प्यार भरी नजरों से देखती हुई गोपियों से पानी में डुबोया जा रहा था। जैसे ही देवता अपने विमानों से उन पर फूल बरसाकर उनकी पूजा कर रहे थे, आत्म-संतुष्ट भगवान ने हाथियों के राजा की तरह खेलने का आनंद लेना शुरू कर दिया।
 
O King, in the water Krishna saw water being scooped up by the gopis who were laughing and gazing lovingly at Him from all sides. While the demigods were worshipping Him by showering flowers on Him from their planes, the self-satisfied Lord began to enjoy playing like the king of elephants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)