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bhagavat 10.33.21: गोपियों ने अपने नायक को अपने गालों की सुंदरता, घुंघराले बालों की चमक और चमचमाते सोने के कुंडल से मधुर हंसी वाली नज़रों से सम्मानित किया। उनके नाखूनों के स्पर्श से पुलकित होकर वे उनके शुभ दिव्य लीलाओं का गान करने लगीं।   |   bhagavat अध्याय 10.33: रास नृत्य   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 33: रास नृत्य  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  10.33.21 
गोप्य: स्फुरत्पुरटकुण्डलकुन्तलत्विड्-
गण्डश्रिया सुधितहासनिरीक्षणेन ।
मानं दधत्य ऋषभस्य जगु: कृतानि
पुण्यानि तत्कररुहस्पर्शप्रमोदा: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
गोपियों ने अपने नायक को अपने गालों की सुंदरता, घुंघराले बालों की चमक और चमचमाते सोने के कुंडल से मधुर हंसी वाली नज़रों से सम्मानित किया। उनके नाखूनों के स्पर्श से पुलकित होकर वे उनके शुभ दिव्य लीलाओं का गान करने लगीं।
 
The Gopis honoured their hero with smiling glances, sweetened by the beauty of their cheeks, the brilliance of their curly hair and the shine of their golden earrings. Thrilled by the touch of their nails, they began to sing songs of His auspicious divine pastimes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)