| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ » अध्याय 33: रास नृत्य » श्लोक 2 |
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| | | | श्लोक 10.33.2  | तत्रारभत गोविन्दो रासक्रीडामनुव्रतै: ।
स्त्रीरत्नैरन्वित: प्रीतैरन्योन्याबद्धबाहुभि: ॥ २ ॥ | | | | | | अनुवाद | | तदनंतर भगवान गोविंद ने यमुना के तट पर उन स्त्री-रत्न गोपियों के संग रासनृत्य लीला शुरू की, जिन्होंने प्रसन्नता से अपनी बाँहों को एक-दूसरे के साथ जोड़ लिया। | | | | तदनंतर भगवान गोविंद ने यमुना के तट पर उन स्त्री-रत्न गोपियों के संग रासनृत्य लीला शुरू की, जिन्होंने प्रसन्नता से अपनी बाँहों को एक-दूसरे के साथ जोड़ लिया। | | ✨ ai-generated | | |
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