Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.33.17: उनको उनके श्री कृष्ण के शारीरिक संसर्ग को पाकर उनकी इंद्रियाँ हर्ष से अभिभूत हो गयीं जिससे वे अपने बालों, वस्त्रों और स्तनों को ढकने वाले वस्त्रों को अस्त-व्यस्त होने से न रोक पायीं। हे कुरुवंश के वीर, उनकी मालाएँ और गहने बिखर गये। | bhagavat अध्याय 10.33: रास नृत्य । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदङ्गसङ्गप्रमुदाकुलेन्द्रिया:
केशान् दुकूलं कुचपट्टिकां वा ।
नाञ्ज: प्रतिव्योढुमलं व्रजस्त्रियो
विस्रस्तमालाभरणा: कुरूद्वह ॥ १७ ॥
अनुवाद
उनको उनके श्री कृष्ण के शारीरिक संसर्ग को पाकर उनकी इंद्रियाँ हर्ष से अभिभूत हो गयीं जिससे वे अपने बालों, वस्त्रों और स्तनों को ढकने वाले वस्त्रों को अस्त-व्यस्त होने से न रोक पायीं। हे कुरुवंश के वीर, उनकी मालाएँ और गहने बिखर गये।
Having received His physical intercourse, the senses of the gopis were overwhelmed with joy, due to which they could not prevent their hair, their clothes and the coverings of their breasts from getting disheveled. O hero of the Kuru dynasty, their garlands and their ornaments got scattered.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥