Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.32.18: हे पतली कमर वाली गोपियों, कुछ लोग सच्चे अर्थों में दयालु होते हैं और माता-पिता की तरह स्वाभाविक रूप से स्नेहपूर्ण होते हैं। ऐसे लोग निस्वार्थ भाव से उन लोगों की भी सेवा करते हैं जो बदले में उन्हें प्रेम नहीं करते। वे ही धर्म के सच्चे और निर्दोष मार्ग का अनुसरण करते हैं और वे ही सच्चे शुभचिंतक होते हैं। | bhagavat अध्याय 10.32: पुन: मिलाप । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भजन्त्यभजतो ये वै करुणा: पितरौ यथा ।
धर्मो निरपवादोऽत्र सौहृदं च सुमध्यमा: ॥ १८ ॥
अनुवाद
हे पतली कमर वाली गोपियों, कुछ लोग सच्चे अर्थों में दयालु होते हैं और माता-पिता की तरह स्वाभाविक रूप से स्नेहपूर्ण होते हैं। ऐसे लोग निस्वार्थ भाव से उन लोगों की भी सेवा करते हैं जो बदले में उन्हें प्रेम नहीं करते। वे ही धर्म के सच्चे और निर्दोष मार्ग का अनुसरण करते हैं और वे ही सच्चे शुभचिंतक होते हैं।
O thin-waisted gopis, some people are truly kind or naturally affectionate like parents. Such people serve devotedly even those who fail to love them in return. They are the ones who follow the true flawless path of Dharma and they are the real well-wishers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥