स्त्रिय उरगेंद्र-भोग-भुज-दंड-विषक्त-धियो
वयं अपि ते समाः समदृशोऽंघ्रि-सरोज-सुधाः
"वे स्त्रियां पूर्णतः अपने चित्त को भगवान श्री कृष्ण की ताकतवर भुजाओं में लगा देती हैं, जोकि महान नागों के शरीर के समान होती हैं। हम भी गोपियों के समान बनना चाहते हैं और उनके कमल के चरणों की सेवा करना चाहते हैं।" श्रुतियों ने ब्रह्मा के पिछले दिन में उनके प्रकट होने के दौरान कृष्ण को देखा था और उनके साथ जुड़ने की सबसे गहन इच्छा से पूर्ण हो गए थे। फिर इस कल्प में वे गोपियां बनीं। और चूंकि वेद मानव समाज में शाश्वत होते हैं, इस कल्प में भी श्रुतियों में कृष्ण की इच्छा पूर्ण हो जाएगी और अगले कल्प में भी वे गोपियां बनेंगी। यह जानकारी श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने दी है।
