श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 30: गोपियों द्वारा कृष्ण की खोज  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.30.8 
मालत्यदर्शि व: कच्चिन्मल्लिके जाति यूथिके ।
प्रीतिं वो जनयन् यात: करस्पर्शेन माधव: ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
हे मालती, हे मल्लिका, हे जाति और हे यूथिका, क्या माधव ने तुम्हें अपने हाथों का सुखद स्पर्श दिया है?
 
O Malati, O Mallika, O Jati and Yuthika, has Madhava passed by this side, giving the pleasure of the touch of his hands to all of you?
तात्पर्य
जब तुलसी जी ने भी गोपियों के प्रश्न का उत्तर नहीं दिया तब वे सुगंधित चमेली के फूलों के पास गयीं। गोपियों ने देखा कि चमेली की बेलें विनम्रता से झुक रही हैं, उन्होंने यह अनुमान लगाया कि इन पौधों ने श्री कृष्ण को देखा होगा और इसलिए वे अपने आनंद में विनम्रता दिखा रही हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)