श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 30: गोपियों द्वारा कृष्ण की खोज  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.30.6 
कच्चित् कुरबकाशोकनागपुन्नागचम्पका: ।
रामानुजो मानिनीनामितो दर्पहरस्मित: ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
हे कुरबक वृक्ष, हे अशोक, हे नागकेसर, पुन्नाग और चंपक, क्या इस मार्ग से बलराम का छोटा भाई गया है, जिसकी हंसी सभी अभिमानी स्त्रियों के गर्व को दूर करने वाली है?
 
O Kurbaka tree, O Ashoka, O Nagakesar, Punnaga and Champaka, has the younger brother of Balarama passed through this path, whose laughter destroys the pride of all proud women?
तात्पर्य
जैसे ही गोपियों ने देखा की एक विशेष पेड़ उन्हें जवाब नहीं देगा, वो से अधीर होकर उसे छोड़कर दूसरे पेड़ की और भाग गईं, जहाँ उन्होंने और पूछताछ की।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)