गोपियाँ पुन: कालिन्दी तट पर आ पहुँचीं। कृष्ण का ध्यान करते हुए और आतुरता से उनकी आशा में बैठीं कि वे अवश्य ही आयेंगे और उनके विषय में गीत गाने लगीं।
The gopis again came to the bank of the Kalindi. Meditating on Krishna and eagerly anticipating his arrival, they sat together to sing songs about him.
तात्पर्य
कठ उपनिषद (1.2.23) में कहा है, यः एवैषं वृणुते तेन लभ्यः। अर्थात "परमात्मा उसी को प्राप्त होता है जिसे वह चुनता है।" इसीलिए गोपियाँ कृष्ण से प्रार्थना करती हैं कि वे उनके पास लौटकर आएँ।
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत तीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥