श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 30: गोपियों द्वारा कृष्ण की खोज  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  10.30.40 
श्रीशुक उवाच
अन्विच्छन्त्यो भगवतो मार्गं गोप्योऽविदूरित: ।
दद‍ृशु: प्रियविश्लेषान्मोहितां दु:खितां सखीम् ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा : जब कृष्ण का मार्ग खोजती हुई गोपियों ने पास ही में अपनी दुखी सखी को देखा, तो वे अचंभित रह गईं। वह अपने प्रेमी की बिछोह सहन न कर पाने के कारण विचलित-सी हो गई थी।
 
Sukadeva Goswami said: The gopis, while searching for Krishna's path, found their distressed friend nearby. She was distraught with the separation from her lover.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)