श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 30: गोपियों द्वारा कृष्ण की खोज  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  10.30.23 
बद्धान्यया स्रजा काचित्तन्वी तत्र उलूखले ।
बध्नामि भाण्डभेत्तारं हैयङ्गवमुषं त्विति ।
भीता सुद‍ृक् पिधायास्यं भेजे भीतिविडम्बनम् ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
एक गोपी ने अपनी एक सुडौल सखी के हाथ-पैर फूलों की माला से बाँधे और कहा, "अब मैं इस बालक को बाँधूँगी जिसने मक्खन के बर्तन फोड़े हैं और मक्खन चुराया है।" तब दूसरी गोपी ने अपना मुँह और सुंदर आँखों को हाथ से ढक लिया और डरने का नाटक करने लगी।
 
One gopi tied a slender friend of hers with a garland of flowers and said, “Now I will tie up this boy who has broken the butter pot and stolen the butter.” Then the other gopi covered her face and beautiful eyes with her hands and pretended to be frightened.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)