श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 30: गोपियों द्वारा कृष्ण की खोज  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.30.20 
मा भैष्ट वातवर्षाभ्यां तत्‍त्राणं विहितं मया ।
इत्युक्त्वैकेन हस्तेन यतन्त्युन्निदधेऽम्बरम् ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
एक गोपी ने कहा, “आँधी-वर्षा से डरो नहीं।” मैं तुम्हारी रक्षा करूँगी।” यह कहते हुए उसने अपनी चुनरी अपने सर पर उठा ली।
 
A gopi said: “Don’t be afraid of the storm and rain. I will protect you.” Saying this she lifted her scarf over her head.
तात्पर्य
यहाँ एक गोपी भगवान कृष्ण का गोवर्धन पर्वत उठाने का अभिनय करती हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)