मानव जीवन सुअर या कुत्ते बनने के लिए नहीं है, बल्कि तपो दिव्यम, पारलौकिक तपस्या के लिए है। प्रत्येक व्यक्ति को तपस्या, तपस्या करना सिखाया जाना चाहिए। हालाँकि पृश्नि और सुतपा जैसी तपस्या करना संभव न हो, फिर भी शास्त्र ने तपस्या की एक विधि का अवसर दिया है जो बहुत आसान है - संकीर्तन आंदोलन। कोई भी कृष्ण को अपने बच्चे के रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या करने की अपेक्षा नहीं कर सकता है, फिर भी केवल हरे कृष्ण महा-मंत्र (कीर्तनाद एवा कृष्णस्य) का जाप करने से, व्यक्ति इतना पवित्र हो सकता है कि वह इस भौतिक दुनिया के सभी संदूषण से मुक्त हो जाता है (मुक्ता-संघ) और अपने घर वापस चला जाता है, भगवान के पास वापस जाता है (परम वृजेट)। इसलिए, कृष्ण चेतना आंदोलन लोगों को खुशी के कृत्रिम साधनों को अपनाने के लिए नहीं, बल्कि शास्त्र में बताए गए खुशी के वास्तविक मार्ग पर चलने के लिए - हरे कृष्ण मंत्र का जाप करने के लिए - और भौतिक अस्तित्व के हर पहलू में पूर्ण होने की शिक्षा दे रहा है।
