वैदिक सभ्यता के अनुसार, प्रजनन धार्मिक सिद्धांतों के विरुद्ध नहीं होना चाहिए और तभी जन्म दर नियंत्रित हो सकती है जैसा कि भगवद् गीता (7.11) में कहा गया है धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोस्मि: धार्मिक सिद्धांतों के विरुद्ध नहीं होने वाला काम सुप्रीम लॉर्ड का प्रतिनिधित्व करता है। लोगों को गर्भाधान संस्कार से शुरु करते हुए, संस्कारों के माध्यम से अच्छे बच्चों को जन्म देने के लिए शिक्षित किया जाना चाहिए, जन्म को यांत्रिक ढंग से नियंत्रित नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह एक पशु सभ्यता की ओर ले जाएगा। यदि कोई धार्मिक सिद्धांतों का पालन करता है, तो वह स्वतः ही जन्म नियंत्रण का पालन करता है, क्योंकि यदि कोई आध्यात्मिक रूप से शिक्षित है तो वह जानता है कि सेक्स के दुष्परिणाम विभिन्न प्रकार के कष्ट (बहु-दुःख-भाज़) होते हैं। जो आध्यात्मिक रूप से उन्नत है, वह अनियंत्रित सेक्स में शामिल नहीं होता है। इसलिए, सेक्स से दूर रहना या अधिक बच्चे पैदा करने से बचना, इसके बजाय लोगों को आध्यात्मिक रूप से शिक्षित किया जाना चाहिए और तब जन्म नियंत्रण स्वतः ही हो जाएगा।
यदि कोई आध्यात्मिक विकास करने के लिए दृढ़ निश्चयी है, तो वह उस बच्चे को पैदा नहीं करेगा, जिसको वह भक्त न बना सके। जैसा कि श्रीमद-भागवतम (5.5.18) में कहा गया है पिता न स स्यात : तब तक कोई व्यक्ति पिता नहीं बनना चाहिए, जब तक वह अपने बच्चे को मृत्यु और जन्म के चक्र से बचाने में सक्षम न हो। पर इस बारे में शिक्षा कहाँ है? एक जिम्मेदार पिता कभी भी कुत्ते-बिल्ली की तरह बच्चे को जन्म नहीं देता। जन्म नियंत्रण के कृत्रिम उपायों को बढ़ावा देने के बजाय, लोगों को कृष्ण चेतना में शिक्षित किया जाना चाहिए, क्योंकि तभी वे अपने बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझ पाएंगे। यदि कोई ऐसे बच्चे को जन्म दे सकता है जो भक्त होंगे और जिन्हें जन्म और मृत्यु के चक्र (मृत्यु-संसार-वर्तमानी) से दूर होना सिखाया जाएगा, तो जन्म नियंत्रण की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके विपरीत, उन्हें बच्चे पैदा करने के लिए उत्साहित किया जाना चाहिए। जन्म नियंत्रण के कृत्रिम उपायों का कोई मूल्य नहीं है। कोई संतान पैदा करता है या नहीं, कुत्ते और बिल्ली जैसे मनुष्यों की संख्या कभी भी मानव समाज को सुखी नहीं करेगी। इसलिए यह आवश्यक है कि लोगों को आध्यात्मिक रूप से शिक्षित किया जाए, ताकि वे कुत्ते-बिल्ली की तरह बच्चे पैदा करने के बजाय, भक्तों को जन्म देने के लिए तपस्या करें। यह उनके जीवन को सफल बनाएगा।
