जन्म ते मय्यसौ पापो मा विद्यान्मधुसूदन ।
समुद्विजे भवद्धेतो: कंसादहमधीरधी: ॥ २९ ॥
अनुवाद
हे मधुसूदन, आपके प्रकट होने से मैं कंस के डर से और अधिक चिंतित हो रही हूँ। इसलिए कुछ ऐसा प्रबंध कीजिए कि वह पापी कंस यह न समझ पाए कि मेरी कोख से आपने जन्म लिया है।
O Madhusudana, with your appearance I am becoming more and more impatient out of fear of Kansa. Therefore do something so that the sinful Kansa does not understand that you were born from my womb.
तात्पर्य
देवकी ने सर्वोच्च भगवान को मधुसूदन के रूप में संबोधित किया। वह जानती थी कि भगवान ने मधु जैसे कई राक्षसों को मार डाला था, जो कंस से सैकड़ों और हजारों गुना अधिक शक्तिशाली थे, फिर भी एक दिव्य बालक के प्रति स्नेह के कारण, वह मानती थी कि कंस उसे मार सकता है। प्रभु की असीम शक्ति को जानने के बजाय, उसने भगवान को स्नेह से याद किया, और इसलिए उसने दिव्य बालक को गायब होने का अनुरोध किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥