श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 3: कृष्ण जन्म  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  10.3.26 
योऽयं कालस्तस्य तेऽव्यक्तबन्धो
चेष्टामाहुश्चेष्टते येन विश्वम् ।
निमेषादिर्वत्सरान्तो महीयां-
स्तं त्वेशानं क्षेमधाम प्रपद्ये ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
हे भौतिक शक्ति के भंडार, यह अद्भुत सृष्टि शक्तिशाली समय के नियंत्रण में कार्य करती है, जो सेकंड, मिनट, घंटे और वर्षों में विभाजित है। यह काल तत्व, जो लाखों वर्षों तक फैला हुआ है, भगवान विष्णु का ही दूसरा रूप है। आप अपने लीलाओं के लिए समय के नियंत्रक के रूप में कार्य करते हैं, किन्तु आप सभी सौभाग्य के आगार हैं। मैं पूरी तरह से आपकी शरण में हूं।
 
O originator of material energy, this wonderful creation functions under the control of the powerful time, which is divided into seconds, minutes, hours and years. This time element, which extends over millions of years, is another form of Lord Viṣṇu. You act as the controller of time in Your pastimes, but You are the reservoir of all good fortune. I surrender completely to You.
तात्पर्य
ब्रह्म-संहिता (5.52) में बताए अनुसार:

यच्चक्षुरेष सविता सकल-ग्रहाणां

राजा समस्त-सुर-मूर्तिरशेष-तेजः

यस्याज्ञया भ्रमति संभृत-काल-चक्रो

गोविंदमादि-पुरुषं तमहं भजामि

"सूर्य सभी ग्रहों का राजा है और उसकी ऊष्मा और प्रकाश की शक्ति असीम है। मैं गोविंद की उपासना करता हूँ - आदिम प्रभु, जो ईश्वर है और जिसके नियंत्रण में सूर्य, जो प्रभु की आंख माना जाता है, भी शाश्वत समय की स्थिर कक्षा में घूमता है।" हालाँकि हम ब्रह्मांडीय प्रकटीकरण को विशाल और अद्भुत रूप में देखते हैं, यह काल, समय तत्व की सीमाओं के भीतर है। भगवद-गीता (मायाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते स-चराचरम) में पुष्टि किए अनुसार, यह समय तत्व भी परमपुरुष ईश्वर के नियंत्रण में है। प्रकृति, ब्रह्मांडीय प्रकटीकरण, समय के नियंत्रण में है। वास्तव में, सब कुछ समय के नियंत्रण में है और समय परमपुरुष ईश्वर के नियंत्रण में है। इसलिए परम प्रभु को समय के हमलों का कोई डर नहीं है। समय का अनुमान सूर्य (सविता) की गति के अनुसार लगाया जाता है। समय के प्रत्येक मिनट, प्रत्येक सेकंड, प्रत्येक दिन, प्रत्येक रात, प्रत्येक माह और प्रत्येक वर्ष की गणना सूर्य की गति के अनुसार की जा सकती है। लेकिन सूर्य स्वतंत्र नहीं है, क्योंकि वह समय के नियंत्रण में है। भ्रमति संभृत-काल-चक्रः : सूर्य काल-चक्र, समय की कक्षा के भीतर घूमता है। सूर्य समय के नियंत्रण में है, और समय परमपुरुष ईश्वर के नियंत्रण में है। इसलिए प्रभु को समय का कोई डर नहीं है।

यहाँ प्रभु को अव्यक्त-बंधु के रूप में संबोधित किया गया है, या सम्पूर्ण ब्रह्मांडीय प्रकटीकरण की गतिविधियों को आरंभ करने वाला। कभी-कभी ब्रह्मांडीय प्रकटीकरण की तुलना कुम्हार के चाक से की जाती है। जब कुम्हार का चाक घूमता है, तो उसे किसने गतिमान किया है? यह निश्चित रूप से कुम्हार है, हालाँकि कभी-कभी हम केवल चाक की गति देख सकते हैं और स्वयं कुम्हार को नहीं देख सकते हैं। इसलिए ब्रह्मांड की गति के पीछे जो प्रभु हैं, उन्हें अव्यक्त-बंधु कहा जाता है। सब कुछ समय की सीमा के भीतर है, लेकिन समय प्रभु के निर्देशन में चलता है, इसलिए वे समय की सीमा के भीतर नहीं हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)